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Tractor Rotavator

जुताई का राजा रोटावेटर(Rotavator)

जुताई का राजा रोटावेटर(Rotavator)

रोटावेटर ट्रैक्टर के साथ चलने वाला जुताई का आधुनिक यंत्र है। जमीन पर बढ़ते फसलों के बोझ की स्थिति में यह सूखे या गीली जमीन में जुताई करने का उपयुक्त माध्यम है। 

इसका खास लाभ किभी फसल के कूडे़ या डंठलों को जमीन में मिलाने के लिए किया जाता है। एक ही जुताइ में खेत को तैयार करने वाली परिस्थितियों के लिए यह बेहद कारगर मशीन है। 

 रोटावेटर मक्का,गेहूं,धान,गन्ना आदि के अवशेष को हटाने अथवा इसके मिश्रण करने के लिए उपयुक्त माना जाता है। रोटावेटर के उपयोग से मिट्टी के स्वास्थ्य में सुधार भी आता है। 

इसके अलावा धन,लागत,समय और ऊर्जा आदि की भी बचत होती है। रोटावेटर के खास तरीके से डिजाइन किए गए ब्लेडों की खास बनावट रोटावेटर को एक मजबूत मशीन का आकार देती है।आज कई कंपनियां अलग- अलग प्रकार के रोटावेटर मशीनें बना रही हैं, जो किसानों का खेती का काम आसान कर रही हैं।

वर्तमान समय में दो प्रकार के रोटावेटर प्रचलन में हैं।पहला टिलमेट और दूसरा सायल मास्टर रोटावेटर

सायल मास्टर रोटावेटर(Soil Master Rotavator)

Soil Master Rotavator


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सायल मास्टर रोटावेटर को किसी भी तरह की मिट्टी में इस्तेमाल किया जा सकता है। इसे कठोर और मुलायम दोनों तरह की मिट्टी के इस्तेमाल के लिए खासतौर से डिजायन किया गया है।

इसकी डिजाइन मजबूत होने के कारण इसमें कम्पन कम होता है और यही कारण है कि ट्रक्टर पर भी भार कम पड़ता है। यह अकेली ही ऐसी मशीन है जिसमें दोनों तरफ बैरिंग लगे हैं।

यही कारण है कि यह सूखी और गीली मिट्टी दोनों पर ही काम करके अच्छे नतीजे देता है। अच्छी क्वालिटी होने की वजह से इसके रखरखाव पर भी कम खर्च आता है। 

इसका बाक्स कवर खेत में काम करते समय गीयर बाक्स को पत्थरों व दूसरी बाहरी चीजों से बचाता है।साइड स्किड असेंबली के साथ जुताई की गहराई में 4 से 8 इंच तक का फेरबदल किया जा सकता है। 

टिलमेट रोटावेटर (Tilmate Rotavator)

इसको खास तरीके से डिजाइन किया गया है। इसमें बोरान स्टील के ब्लेड लगे होते हैं। इसमें एक गियर ड्राइव भी लगा होता है जिसकी वजह से यह लंम्बे समय तक चलता है। 

इसमें ट्रेनिंग बोर्ड को एडजस्ट करने के लिए ऑटोमैटिक सिं्प्रग लगे होते हैं। इसका भी प्रयोग गीले और सूखे दोनों ही स्थानों पर कर सकते है। रोटाबेटर अन्य जुताई मशीनों की तुलना में डीजल की भी काफी बचत करता है। 

यह मिट्टी को तुरंत तैयार कर देता है जिससे पिछली फसल की मिट्टी की नमी का पूर्णतया उपयोग में आ जाता है। रोटावेटर का उपयोग 125 मिमी -150 मिमी की गहराई तक की मिट्टी के जुताई के लिए उपयुक्त है। 

इससे बीज की बुआई में आसानी रहती है। इससे जुताई अन्य यंत्रों के मुकाबले चैथाई समय में ही हो जाती है। इसका उपयोग फसलों के अवशेषो को हटाने में भी किया जाता है। इसे चलाते समय खेत में घुमाने में भी आसानी रहती है।

इस पेड़ की खेती करके किसान भाई कर सकते हैं अच्छी खासी कमाई

इस पेड़ की खेती करके किसान भाई कर सकते हैं अच्छी खासी कमाई

देश के किसान इन दिनों पारंपरिक खेती करने में व्यस्त हैं। वो ज्यादातर गेहूं, मक्का, धान, तिलहन, दलहन की पारंपरिक फसलें ही उत्पादित करते है। जिससे किसानों को अपनी आवीविका चलाने के लिए पर्याप्त कमाई हो जाती है। लेकिन बहुत सारे किसान ऐसे भी हैं, जो पारंपरिक खेती के इतर आधुनिक एवं वैज्ञानिक तरीके से खेती करते हैं। जिससे किसानों को अतिरिक्त कमाई होती है, जो उनके जीवनशैली में परिवर्तन लाने में सहायक होती है।


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ऐसी ही एक फसल है जिसे हम पॉपुलर के पेड़ों की खेती के नाम से जानते है। पेड़ों की यह फसल किसानों को अतिरिक्त कमाई करवा सकती है। इसकी मांग अब देश के साथ अन्तर्राष्ट्रीय बाजार में बेहद तेजी से बढ़ी है। इन दिनों पॉपुलर के पेड़ों की लकड़ी बाजार में बेहद महंगे दामों पर बिकती है।

इस प्रकार की भूमि होती है पॉपुलर के पेड़ों की खेती के लिए सबसे उपयुक्त

अगर पॉपुलर की खेती की बात करें तो इसकी खेती के लिए खेत में उपजाऊ मिट्टी होना बेहद आवश्यक है। इसके साथ ही कभी भी क्षारीय नेचर की मिट्टी में पॉपुलर के पौधों की बुवाई नहीं करना चाहिए। इसके नकारात्मक परिणाम देखेने को मिल सकते हैं। इसकी खेती के लिए भूमि का pH मान 5.8-8.5 के बीच होना चाहिए। साथ ही बुवाई के समय खेत का तापमान 20 डिग्री सेल्सियस के आस पास होना चाहिए। इसके साथ ही अगर अधिकतम तापमान की बात करें पॉपुलर की खेती 45 डिग्री सेल्सियस तक का तापमान सहन कर सकती है। साथ ही न्यूनतम तापमान 10 डिग्री सेल्सियस होना चाहिए। पॉपुलर की खेती आर्गेनिक तत्वों वाली भूमि में बेहतर परिणाम दे सकती है।

इस तरह से करें पॉपुलर के पौधे की रोपाई

चूंकि पॉपुलर के पेड़ों की जड़ें गहरी होती हैं इसलिए इसके लिए खेत में गहरी जुताई आवश्यक होती है। खेत की गहरी जुताई करने के बाद खेत में पानी लगाएं। इसके बाद रोटावेटर की मदद से कम से कम तीन बार जुताई करें। इसके बाद खेत को समतल कर दें और 5 मीटर की दूरी पर पक्तियां बना लें। पंक्तियों में 6 मीटर की दूरी पर एक मीटर गहरे गड्ढे बनाएं और उन गड्ढों में पौधे की रोपाई करें। पॉपुलर के पेड़ों की रोपाई के लिए फरवरी माह सबसे उपयुक्त होता है। इसलिए इनकी रोपाई 15 फ़रवरी से 10 मार्च के बीच करनी चाहिए। इस अवधि में पौधों की रोपाई करने से पौधों का विकास तेजी से होता है।

पॉपुलर के पेड़ों की खेती करने से किसान भाई बन सकते हैं मालामाल

पॉपुलर की खेती करके कई किसानों ने भारत में जमकर रुपये कमाए हैं। इसकी पौध को खरीदना एवं लगाना बेहद सस्ता है जबकि इसकी अपेक्षा इसके पेड़ों की कीमत ज्यादा होती है। पॉपुलर की लकड़ी बाजार में 800 रुपये प्रति क्विंटल के भाव से बिकती है। किसान भाई इन पेड़ों की एक हेक्टेयर में खेती करके लगभग 10 लाख रुपये कमा सकते हैं। एक हेक्टेयर खेत में लगभग 250 पॉपुलर के पेड़ लगाए जा सकते हैं। इन दिनों देश में पॉपुलर की खेती सबसे ज्यादा पश्चिमी उत्तर प्रदेश में होती है। जहां से इनका विदेशों में भी निर्यात किया जाता है।